आरक्षण सूची के बाद अब तक खैलार में 5 प्रत्याशी आये सामने

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AMIT SONI

 खैलार। मार्च 2021 तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो सकते हैं। शासन-प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं, लेकिन राजनीतिक दल उहापोह की स्थिति में हैं। सभी दल खुद को ग्राम प्रधान चुनाव से दूर रख रहे हैं, उनका फोकस जिला पंचायत सदस्य के चुनाव पर है। इसकी वजह जातीय समीकरणों को माना जा रहा है। पार्टियों को डर है कि ग्राम प्रधान के चुनाव में एक ही जाति के कई प्रत्याशी चुनाव मैदान में होते हैं। ऐसे में एक प्रत्याशी का समर्थन उस जाति के तमाम दूसरे लोगों के विरोध का कारण बन सकता है, आगामी विधानसभा चुनाव में जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश में अभी तक कभी भी दलीय आधार पर पंचायत चुनाव नहीं हुआ है। अभी तक राजनीतिक दल जिला पंचायत सदस्य और अध्यक्ष के चुनाव में खुलकर समर्थित प्रत्याशी देते रहे हैं। इसके अलावा बीडीसी चुनाव में भले ही पार्टियों का कभी सीधा दखल नहीं रहा, लेकिन समर्थित ब्लॉक प्रमुख बनाने के लिए सब दांव-पेंच चलते रहे हैं। लेकिन, इस बार राजनीतिक सरगर्मी ने गांवों के चुनाव की तपिश बढ़ा दी है। बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस के अलावा तमाम छोटे दल भी पंचायत चुनाव में दो-दो हाथ करने को तैयार हैं।

इतिहास में पहली बार ग्रामीणों ने चुना प्रत्याशी

दरअसल झाँसी के बबीना विकास खण्ड के खैलार ग्राम पंचायत में कई सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, कि एक बड़े जनसमूह ने एक प्रत्याशी को चुनाव के पहले ही चुन डाला। ऐसा नही है कि इस ग्रामसभा में और प्रत्याशी अपनी दाबेदारी न कर रहे हो, लेकिन आरक्षण सूची आने के बाद इस ग्राम सभा में एक बड़े राजनीतिक परिवार का समर्थन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुँचे और औपचारिक घोषणा में अपना नया प्रधान चुन लिया। वहीं दूसरी और गाँव के जातिगत वोटबैंक को लेकर प्रत्याशियों ने सूची बनाना शुरू कर दी हैं। सूत्रों की माने तो ग्राम खैलार में अभी तक पिछड़ी जाति के आधार पर 5 प्रत्याशी ताल ठोक रहे है। ऐसे में आम जनता का मानना है कि प्रत्याशियों की संख्या और बढ़नी चाहिए, जिससे सही चुनाव करने में सहूलियत हो।

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