बीएचईएल में काव्य संगोष्ठी का हुआ आयोजन

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झाँसी। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित महारत्न कम्पनी बीएचईएल में आजादी का अमृत महोत्सव श्रंखला के अंतर्गत मानव संसाधन विकास केन्द्र में काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वरि.उप महाप्रबंधक (मा.सं.)  कुलदीप कुमार चौहान के मुख्य आतिथ्य एवं उप महाप्रबंधक (वित्त) राम स्वरूप यादव की अध्यक्षता में सरस्वती मां के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ काव्य संध्या का विधिवत शुभारम्भ हुआ।

 

आजादी को समर्पित काव्य समारोह में कवियों ने विविध रस रंग की काव्य धारा को प्रवाहित किया। राम कुमार पाण्डेय ने ईश वंदना से काव्य समारोह का श्री गणेश किया तथा देव कुमार ने नारी महिमा का बखान करते हुए कहा कि “नर को इंसान बनाती हो, जो भटका हो जीवन पथ पर, उसको सुमार्ग दिखलाती हो”। राजेश तिवारी ने क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के कृतित्व पर रचना पाठ करते हुए कहा- “आजाद तो सदा आजाद रहा है”। ओजपूर्ण शैली में पाठ करते मो. आरिफ खान ने अपनी गजल में कहा– तहजीब में, चलन में, हवा में, लिबास में, हम इण्यिन भी मेड इन जापान हो गए। इसी क्रम में राम कुमार पाण्डेय ने हास्य कविता– “फूलों में सबसे बड़ा है गोभी का फूल” सुनाकर सभी को गुदगुदाया।

नारायण त्रिपाठी ने कोमल गीत पढ़ा- “शस्य श्यामला भारत भूमि  देख तिरंगा हरषाती, अमृत सम गंगाजल जिसका चंदन है जिसकी माटी”। सगीर अहमद ने गजल पढ़्ते हुए कहा कि “तरक्की से बढ़्ती दुनियॉं में, अभी भी भूख से बहुत बच्चे मोहताज है”। वैभव दुबे ने “कटा है सिर नुंची ऑंखें, मगर सम्मान बाकी है, किए टुकड़े मेरे, फिर भी मेरी पहचान बाकी है” रचना पढ़ीI  संजय मिश्र ने “प्रतिस्पर्धा के इस युग में, गुणवत्ता विजय दिलाएगी” कविता पढ़ी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यादव ने कहा- “आज दहकती दुनियॉं, चारों ओर बह रहा खून, बर्बर आतंकी गोलों से अपने भाई को रहा है भून” I उप प्रबंधक (मा.सं./राजभाषा/सं.ज.सं.) डॉ संतोष कुमार मिश्र ने वर्तमान परिवेष पर मार्मिक आह्वान करते हुए गीत गुनगुनाया– पग सम्भालो ललन रो रही है धरा, आज अपना चलन खो रही है धरा। डॉ मिश्र ने काव्य समारोह का सफल संचालन किया तथा काव्य संध्या में पधारे अतिथियों, कवियों के साथ समारोह में उपस्थित काव्य रसिकों का आभार व्यक्त किया।

 

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