यूपी पुलिस के सिपाही की गुंडई, गैर जनपद के सिपाही ने चौकी में घुसकर पीड़ित को पीटा

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झाँसी। देश का सबसे बड़ा सूबा जहां योगी राज है। कहते हैं, योगी राज में प्रदेश में पूरी तरह गुंडई खत्म हो चुकी है। लेकिन जिस विभाग के हांथो में गुंडाराज खत्म करने की कमान दी हो उसी विभाग के नुमांइदे गुंडई पर उतारू हो जाये तो फिर भला कैसे गुंडाराज समाप्त होगा।

मामला उत्तर प्रदेश के झाँसी जनपद का है जहाँ बाँदा जनपद में तैनात एक सिपाही ने झाँसी के बबीना थाना क्षेत्र के बीएचईएल चौकी में घुसकर एक पीड़ित को मारना शुरू कर दिया। वहीं चौकी पर तैनात पुलिस कर्मियों ने बीच बचाब कर दोनों पक्षों को समझा बुझा कर घर भेज दिया।

हुआ यूं कि बाँदा में तैनात सिपाही का एक छोटा भाई है जोकि अपने भाई की वर्दी का खौफ पूरे क्षेत्र में फैलाना चाहता है और उसी दम पर आये दिन लड़ाई-झगड़ा कर क्षेत्र वासियों को परेशान करता है। स्थानीय लोग बताते है कि छोटी बड़ी चोरियों में भी कई बार पुलिस के हाथ लगा लेकिन जब उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी घर में हो तो भला कोई क्या उखाड़ लेगा। बस फिर क्या है जब-जब पुलिसिया भाई छुट्टी घर आये तो समझ लीजिए कि एक-दो की हजामत तो होनी ही है।

कल देर शाम कुछ ऐसा ही हुआ जब सिपाही के छोटे भाई ने एक दूसरे पक्ष से लड़ाई कर ली। वही झगड़े के बाद पीड़ित पक्ष पुलिस से गुहार लगाने चौकी पहुँचा।  इस बात की भनक  सिपाही भाई को लग गई, फिर क्या था वह चौकी पहुँचा और ‘न आओ देखा न ताओ’ पीड़ित पर लात-घूसे बरसाना शुरू कर दिये। झगड़ा देख चौकी में तैनात सिपाहियों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को तकरीबन दो घंटे तक समझाया और घर भेज दिया।  एक बार फिर सत्य पर असत्य की जीत हुई, लेकिन सवाल उठता है पुलिस की कार्यशैली पर क्या ऐसे अराजक तत्वों का सहयोग करना ठीक बात है? या कब तक पुलिस अपने संरक्षण में ऐसे अपराधियों को पनपने देगी? इस पूरे मामले में फिलहाल में पीड़ित पुलिस के खौफ से डरकर घर बैठे गया। लेकिन सबाल उठता है कि ऐसे अराजक तत्वों पर कार्यवाही कब होगी।

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